Tuesday, 13 November 2007

पूछ

नेकी और पूछ पूछ
किसकी पूछ?

नेकी और पूछ पूछ
गधे की पूछ....

नेकी और पूछ पूछ
किसकी पूछ?

नेकी और पूछ पूछ
मुर्गे की पूछ....

नेकी और पूछ पूछ
किसकी पूछ?

नेकी और पूछ पूछ
ऊँट की पूछ...

Thursday, 1 November 2007

मेरी कविता और उसके पेज
इससे तोः अच्छा होता की एक रफ कॉपी ही ले ली होती
मेरी कविता उसके पेज, एक प्रयास है हर नर और नारी के अंतर्मन में छुपे हुए कवि को अपनी प्रतिभा को निखारने का एक अवसर देने का, एक प्रयास है कवि मन की भावनाओं को निःसंकोच प्रकट करने हेतु मंच प्रदान करने का और एक प्रयास है सभी समान विचारधारा के लोगों को एकछत्र लाने का और यह प्रयास तभी सार्थक हो सकता है जब वो सभी जो कि कभी भी कहीं भी अपने द्वारा कही गई छोटी या बड़ी कविताओं को इस मंच पर प्रस्तुत करे, इस कविता संकलन में सम्मिलित करे इस संकलन में कविता प्रस्तुत करने हेतु कविता किसी भी रूप या किसी भी भाषा में कही जा सकती है और इस प्रयास के प्रथम पृष्ठ को अपनी कमनीय कलम से उद्भाषित करेंगे हमारे कविता कानन केसरी "कवि महोदय" सिद्धांत तिवारी

हराम khor

हरे आम लाते हो , उन्हें अकेले ही खा जाते हो
इसीलिए तो तुम हराम खोर कहलाते हो