जिंदगी सोते सोते बीत गई तो क्या ग़म चच्चू |
मुर्दे क्या जाने कि सोना किसे कहते हैं ||
Friday, 20 February 2009
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मेरी कविता उसके पेज, एक प्रयास है हर नर और नारी के अंतर्मन में छुपे हुए कवि को अपनी प्रतिभा को निखारने का एक अवसर देने का, एक प्रयास है कवि मन की भावनाओं को निःसंकोच प्रकट करने हेतु मंच प्रदान करने का और एक प्रयास है सभी समान विचारधारा के लोगों को एकछत्र लाने का, इस कविता संकलन में सम्मिलित करे इस संकलन में कविता प्रस्तुत करने हेतु कविता किसी भी रूप या किसी भी भाषा में कही जा सकती है
3 comments:
भइया ये शेर नहीं बब्बर शेर है !
बंधु
कृपया वर्ड वैरिफिकेशन की उबाऊ प्रक्रिया हटा दें ! इसकी वजह से प्रतिक्रिया देने में अनावश्यक
परेशानी होती है !
तरीका :-
डेशबोर्ड > सेटिंग > कमेंट्स > शो वर्ड वैरिफिकेशन फार कमेंट्स > सेलेक्ट नो > सेव सेटिंग्स
आज की आवाज
ब्लॉग जगत में आपका स्वागत है.
बहुत सुंदर…..आपके इस सुंदर से चिटठे के साथ आपका ब्लाग जगत में स्वागत है…..आशा है , आप अपनी प्रतिभा से हिन्दी चिटठा जगत को समृद्ध करने और हिन्दी पाठको को ज्ञान बांटने के साथ साथ खुद भी सफलता प्राप्त करेंगे …..हमारी शुभकामनाएं आपके साथ हैं।
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